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शहर के कालीदास बांध से पानी लेकर नगर पालिका द्वारा शहर में पेयजल की सप्लाई की जाती है। सप्लाई किए जाने वाले पानी का आम जन के स्वास्थ्य से सीधा संबंध है।
बावजूद इसके, पानी के टेस्ट के मापदंडों के पालन में कोताही बरती जा रही है। कालीदास बांध के पास बेतवा नदी के नजदीक दो फिल्टर प्लांट स्थित हैं। इनमें से एक 16 एमएलडी क्षमता का है और दूसरा पुराना वाला 9 एमएलडी क्षमता का है। पुराने फिल्टर में पानी की जांच के लिए केमिस्ट लैब तो बनी हुई है, लेकिन वहां कोई केमिस्ट नहीं है। इतना ही नहीं, पानी में कब कितनी मात्रा में एलम, क्लोरीन, और ब्लीचिंग डालना है, इसके लिए प्रशिक्षित व्यक्ति की तैनाती नहीं की गई है। पुराने फिल्टर प्लांट में तैनात कर्मचारी पूरन सिंह कुशवाह ने बताया कि मैं केमिकल डालकर पता कर लेता हूं कि पानी में एलम, क्लोरीन और ब्लीचिंग की मात्रा सही है या नहीं। केमिकल डालने के बाद पानी का रंग बदल जाता है, इसी रंग के आधार पर पता कर लेते हैं। यह काम सालों से करता आ रहा हूं।
केमिस्ट लैब के बाहर दीवार पर तीन से अधिक सूचना पटल लगे हैं। इनमें कर्मचारियों के नाम सहित पानी की जांच के बाद उसकी जानकारी अंकित की जाने का प्रावधान है। इसके बावजूद भास्कर पड़ताल में सभी सूचना पटल खाली मिले, उनमें कोई भी जानकारी दर्ज नहीं थी। केमिस्ट लैब में भी ताला लगा मिला।



