खरखौदा कोर्ट के आदेश पर वकील पर मामला दर्ज किया गया है
खरखौदा बार एसोसिएशन से जुड़े वकीलों और एक कथित वकील के बीच हुए विवाद के बाद लंबे समय से चल रही शिकायत पर कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाते हुए SHO खरखौदा को एफ आई आर दर्ज करने के आदेश जारी किए। कोर्ट ने माना कि पुलिस द्वारा लापरवाही बरती गई और संज्ञेय अपराध क
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शिकायतकर्ताओं ने कोर्ट में दी विस्तृत शिकायत
मामले के शिकायतकर्ता कमल शर्मा और गौरव शर्मा, दोनों वकीलों, ने कोर्ट को बताया कि वे खरखौदा कोर्ट कैंपस में वकालत करते हैं और बार एसोसिएशन द्वारा प्रशासनिक मुद्दों को लेकर शांतिपूर्ण बैठक की जा रही थी। इस दौरान आरोपी अजय शर्मा मौके पर पहुंचा और बार सदस्यों को गंदी गालियां दीं। शिकायतकर्ताओं के अनुसार, उन्हें रोकने पर आरोपी ने धमकी दी कि “70 रुपए की गोली में किसी भी वकील को खत्म किया जा सकता है और उसके पास गाड़ी में हथियार मौजूद है।”
धमकियों से वकील सहमे, पुलिस को दी तत्काल सूचना
घटना के बाद शिकायतकर्ताओं ने 112 नंबर पर फोन कर पुलिस को बुलाया। पुलिस मौके पर पहुंची और आरोपी अजय शर्मा को थाने ले जाने की बात कही। इसके बाद शिकायत थाना खरखौदा में 5 अप्रैल 2024 को दर्ज कराई गई, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की। RTI जवाब में भी साफ हुआ कि पुलिस आरोपी को थाने तक लेकर आई थी, बावजूद इसके उसके खिलाफ मामला दर्ज नहीं किया गया।
खरखौदा कोर्ट
पुलिस पर लापरवाही और पक्षपात के आरोप
शिकायतकर्ताओं ने आरोप लगाया कि पुलिस ने न केवल उनकी शिकायत पर कार्रवाई नहीं की, बल्कि उल्टा उन्हें और अन्य अधिवक्ताओं को FIR नंबर 185/2024 में आरोपी बना दिया। इससे साफ संकेत मिलता है कि पुलिस और आरोपी के बीच मिलीभगत थी। पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना IPC की धारा 166A और 167 के उल्लंघन के दायरे में आता है, इसलिए कोर्ट के समक्ष 156(3) CrPC के तहत आवेदन दाखिल किया गया।
कोर्ट ने माना कि संज्ञेय अपराध बनता है, FIR के आदेश जारी
मामले पर सुनवाई करते हुए SDJM खरखौदा ने माना कि 323 और 506 IPC की धाराओं के तहत बनाए गए आरोप संज्ञेय अपराध की श्रेणी में आते हैं। कोर्ट ने कहा कि SHO संज्ञेय अपराध की सूचना पर FIR दर्ज करने के लिए बाध्य है, चाहे आरोप सही हों या नहीं,ये जांच का विषय है। इस आधार पर अदालत ने थाना प्रभारी खरखौदा को धारा 154 CrPC के तहत FIR दर्ज करने और आवश्यक कार्रवाई करने के आदेश दिए।
अदालती आदेश पर FIR दर्ज, आगे की जांच शुरू
अदालत के आदेश के बाद 18 नवंबर 2025 को धारा 323/506 IPC के तहत दर्ज की गई। FIR दर्ज करते समय SHO को मामले की जानकारी दी गई और आगे की कार्रवाई मुंशी अजय को सौंप दी गई। यह FIR अदालत के आदेश के अनुपालन में ASI संजय की उपस्थिति में दर्ज की गई।