जयपुर में किस्मत से बचीं 50 से ज्यादा जिंदगियां:  करंट से 2 मौतें, हाईटेंशन लाइन देख यात्रियों ने उतारने को कहा, बस ड्राइवर नहीं माना – Rajasthan News

जयपुर में किस्मत से बचीं 50 से ज्यादा जिंदगियां: करंट से 2 मौतें, हाईटेंशन लाइन देख यात्रियों ने उतारने को कहा, बस ड्राइवर नहीं माना – Rajasthan News


जयपुर शहर से 50 किमी दूर मनोहरपुरा के पास बस हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई थी। पीलीभीत (UP) के रहने वाले 2 मजदूरों की मौत हो गई थी, जबकि 10 झुलस गए थे।

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ये कहना है पीलीभीत (UP) जिले के पूरनपुर गांव से जयपुर ईंट भट्टे पर मजदूरी करने आए शफीक अहमद का। शफीक भी हाईटेंशन लाइन के करंट की चपेट में आई बस में सवार थे।

28 अक्टूबर को 65-70 मजदूरों और उनके परिवार से भरी बस जयपुर शहर से 50 किमी दूर मनोहरपुरा के पास हाईटेंशन लाइन की चपेट में आ गई थी। इसके बाद आग लग गई। हादसे में पीलीभीत (UP) के रहने वाले 2 लोगों की मौत हो गई, 10 मजदूर झुलस गए थे।

किस्मत से लाइन ट्रिप हो गई और कुछ ही सेकेंड में करंट की सप्लाई बंद हो गई थी। अगर ऐसा नहीं होता तो हादसा और भयावह हो सकता था।

पढ़िए पूरी रिपोर्ट…

बस में आग लगते ही स्थानीय लोग मौके पर पहुंचे और बस में फंसे लोगों को बाहर निकालने का प्रयास शुरू किया।

27 अक्टूबर रात में निकले थे UP से शफीक अहमद कहते हैं- बस में पीलीभीत (UP) के पूरनपुर के अलावा शेरपुर, कल्यानपुर गांव से 14-15 परिवारों के करीब 65-70 लोग मजदूरी के लिए 27 अक्टूबर की रात 9 बजे निकले थे। रास्ते भर कोई चेकिंग नहीं हुई। बस हापुड़, मथुरा, दौसा होते हुए मनोहरपुर पहुंची थी।

बस टोड़ी गांव की सीमा में घुसी। रास्ता खराब काफी खराब था। ऐसा लग रहा था कि बस पलट जाएगी। हमने ड्राइवर को स्कूल के पास बने भट्टे पर ही उतार देने को कहा, लेकिन वह नहीं माना। यहां से फौजी का भट्टा (जहां जाना था) एक किलोमीटर ही दूर था। ड्राइवर कीचड़ वाले रास्ते से बस को ले जाने लगा।

हाईटेंशन तार देखने के बाद हमने उसे फिर से उतारने के लिए कहा, लेकिन वो नहीं माना। कंडक्टर को नीचे भेज दिया ये देखने के लिए कि तार बस से न भिड़े। जैसे ही तार बस के ऊपर रखी बाइक में फंसा पूरी गाड़ी में करंट दौड़ गया। कंडक्टर भाग गया। उसे देख ड्राइवर भी भाग गया। इतना ही बोला कि- भाग निकलो। जान बचाओ।

मजदूरों को इसी भट्‌टे तक जाना था। जहां हादसा हुआ, यहां से वह जगह महज 1 किलोमीटर दूर है।

मजदूरों को इसी भट्‌टे तक जाना था। जहां हादसा हुआ, यहां से वह जगह महज 1 किलोमीटर दूर है।

पलभर में अफरा-तफरी मच गई मजदूरों को कुछ समझ नहीं आया। अफरा-तफरी मच गई। बस का जो भी हिस्सा पकड़ रहे थे उसी में करंट था। नसरीन, सैनम को भी करंट लगा। वो बचकर भाग नहीं सके और वहीं खत्म हो गए। बाकियों ने जैसे-तैसे बस से निकलकर जान बचाई। जिस जगह हादसा हुआ, वो ढाणी जैसा इलाका है। घर दूर-दूर थे। ऐसे में समय पर पानी ना डालने से भी आग बढ़ती गई।

8-9 महीने के लिए जयपुर आते हैं शफीक बताते हैं- यहां हम लोग बीते दो साल से आ रहे हैं। यहां अक्टूबर से जून तक काम करते हैं। फिर अपने गांव लौट जाते हैं। एक मजदूर को 1000 कच्ची ईंट बनाने पर 470 रुपए दिहाड़ी मिलती है। जयपुर आने का खर्चा ठेकेदार का होता है। वही इंतजाम करता है। वापसी में किराया हम लोग ही देते हैं। इस बार तीन बसें पीलीभीत से जयपुर और हरियाणा के लिए निकलीं। कई साथी तो दीपावली से पहले ही आ चुके हैं। ज्यादा लोग थे, इसलिए स्लीपर बस की गई थी। हादसे के बाद जयपुर आ रही दूसरी बस को जहां है, वहीं रोक दिया है।

गृहस्थी की जरूरत का सारा सामान साथ लेकर चलते नईम बानो और मेहरुन्निसा ने बताया- ये ज्यादातर परिवार कच्चे या झोपड़ीनुमा मकानों में रहते हैं। 9 महीने घर–गांव से बाहर रहते थे। पीछे से चोरी न हो जाए या किसी चीज की जरूरत न पड़ जाए, इस वजह से अपनी पूरी गृहस्थी और जरूरत का सामान जैसे सिलेंडर, बर्तन आदि साथ लेकर चलते हैं। हादसे के समय 8 से 10 सिलेंडर रखे थे, जिनमें 2 में गैस थी। आग लगने के बाद इन्ही में ब्लास्ट हुआ। जो नकद पैसा लाए थे, वह भी जलकर राख हो गया। हादसे में बचे लोग खासकर महिलाएं अपनों का हाल जानने के लिए परेशानी होती रहीं, क्योंकि इनके मोबाइल जल जाने से किसी की बात ही नहीं हो पा रही थी।

मजदूर परिवार सिलेंडर व दूसरे जरूरी सामान अपने साथ ही लेकर चलता था।

मजदूर परिवार सिलेंडर व दूसरे जरूरी सामान अपने साथ ही लेकर चलता था।

फॉल्ट से लाइन ट्रिप होने से बच गईं कई जान गांव वालों ने बताया कि बस और उसके ऊपर बंधा सामान हाईटेंशन लाइन की चपेट में आया तो लाइन ट्रिप हो गई। इसकी वजह से कई जानें बच गईं। एक भट्टा मालिक ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव वालों ने कई बार बिजली विभाग को लाइन की मरम्मत और तार ऊंचा करने के लिए कहा है, लेकिन कोई सुनवाई नहीं हो रही।

लाइन ट्रिप होने से कुछ ही सेकेंड में बिजली की सप्लाई बंद हो गई थी। वरना हादसा और भयावह हो सकता था।

लाइन ट्रिप होने से कुछ ही सेकेंड में बिजली की सप्लाई बंद हो गई थी। वरना हादसा और भयावह हो सकता था।

जैसलमेर वाली खामियां यहां भी नजर आईं जैसलमेर में 14 अक्टूबर को हुए स्लीपर बस अग्निकांड में जो खामियां सामने आईं थीं, वो इस बस में भी देखने को मिलीं। हादसे में बची मेहरुन्निसा ने बताया कि करंट लगने से कई लोग बेहोश हो गए। भगदड़ में सारी भीड़ एक ही दरवाजा होने से पायदान पर ही अटक गई। एक औरत का बायां पांव का पंजा भी पायदान में करंट लाने से कट गया। अफरा-तफरी मची तो लोगों ने कांच तोड़ना शुरू किया।

यूनुस ने बताया कि पिछले कांच को तोड़कर एक साथ काफी लोग बाहर निकल सकते थे, लेकिन वो टूटा ही नहीं। उसके पीछे लोहे की चादर लगा रखी थी। आग बुझाने का यंत्र भी नहीं था। दरवाजा इतना जाम था कि काफी जोर लगाने पर भी नहीं खुला।

हादसे के बाद लोगों ने पीछे का कांच तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं तोड़ पाए।

हादसे के बाद लोगों ने पीछे का कांच तोड़ने की कोशिश की, लेकिन नहीं तोड़ पाए।

देश में 15 दिन में बस में आग की बड़ी घटनाएं

14 अक्टूबर: जैसलमेर-जोधपुर हाईवे पर चलती एसी स्लीपर बस में आग लग गई थी। इस हादसे में 28 यात्रियों की मौत हो गई थी।

24 अक्टूबर: आंध्र प्रदेश के कुरनूल में एसी बस से बाइक टकराने के बाद आग लग गई थी। हादसे में 20 लोगों की जलकर मौत हो गई। 19 यात्रियों ने बस से कूदकर जान बचाई।

25 अक्टूबर: एमपी के अशोकनगर जिले में शनिवार रात बस में आग लग गई। यह शिवपुरी जिले के पिछोर से इंदौर जा रही थी। बस पूरी तरह जल गई। इसमें इंदौर जाने वाले यात्री सवार थे। बस में सवार एक पुलिसकर्मी और ड्राइवर ने कांच तोड़कर यात्रियों को बाहर निकाला। हादसे में कोई हताहत नहीं हुआ।

26 अक्टूबर: यूपी के लखनऊ में आगरा एक्सप्रेस-वे पर चलती AC बस का टायर फट गया। इसके बाद बस में आग लग गई। बय में 70 यात्री सवार थे, सभी बाल-बाल बचे।

जयपुर बस हादसे की ये खबरें भी पढ़िए…

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जयपुर में 65 लोगों से भरी बस हाईटेंशन लाइन से टकराते ही आग का गोला बन गई। करंट फैलते ही लोग खिड़कियां तोड़कर बाहर कूद गए। आग में झुलसने से 2 लोगों की मौत हो गई। पढ़ें पूरी खबर…



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