.
शहर के होटल में एमएसएमई इंडस्ट्रीज एसोसिएशन ने कच्चे माल पर केंद्र सरकार की तरफ से सितंबर में लागू किए गए 18% जीएसटी से पैदा हुई दिक्कतों पर चर्चा की है। एसोसिएशन के मेंबर पाइप फिटिंग, स्केफ फोल्डिंग, ऑटो पार्ट्स, पैकेजिंग प्रोडक्ट बनाते हैं। कारोबारियों ने कहा कि कच्चे माल पर 18% टैक्स है, लेकिन जब यह आगे रिटेल बाजार में बिकता है तो इस पर 5% जीएसटी है।
इससे बड़ी परेशानी है। वजह यह है कि 100 रुपए की चीज पर 18% जीएसटी सहित 118 रुपए हर इंडस्ट्री मालिक जेब से खर्चता है। जबकि ग्राहक को बिक्री के वक्त 5% जीएसटी सहित 105 रुपए में बिक्री होती है। इस तरह 13 रुपए कारोबारी की जेब से अधिक जाते हैं, इसे जीएसटी विभाग इनपुट क्रेडिट टैक्स प्रणाली के जरिये वापस करेगा लेकिन यह लंबी प्रक्रिया है। एसोसिएशन ने कहा कि सरकार कच्चे माल पर टैक्स घटाए ताकि 13% का घाटा खत्म हो।
मीटिंग के दौरान संगठन के प्रधान गुरचरण सिंह ने कहा कि सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्योगों (एमएसएमई) का संकट बढ़ा है। नए जीएसटी नियमों ने असंतुलन पैदा कर दिया है। जिस पैसे से हमने व्यापार करना है, वो सरकारी जेब में अटक रहा है।
इस दौरान चेयरमैन अशोक मल्होत्रा, इंजीनियरिंग इंडस्ट्रीज एसो. के प्रधान सुनील शर्मा, जलज शर्मा, अंकुर कोहली, राजीव जैरथ, दर्शन सिंह, एनके कोहली, मलकीयत सिंह, संदीप अग्रवाल, परगट सिंह, दीप अग्रवाल, सुमित दुग्गल, अमित दुग्गल व अन्य मौजूद रहे।



