सब इंस्पेक्टर (एसआई) भर्ती-2021 को रद्द करने के अपने फैसले में एकलपीठ द्वारा आरपीएससी सदस्यों के खिलाफ की गई टिप्पणियों के खिलाफ तत्कालीन आरपीएससी सदस्य मंजू शर्मा ने अपील दायर की हैं।
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मंजू शर्मा ने हाईकोर्ट की डिवीजन बैंच में अपील दायर करते हुए अपने खिलाफ की गई टिप्पणियों को हटाने का मांग की हैं। उन्होने अपील दायर करते हुए कहा कि उनके खिलाफ कठोर और अनुचित टिप्पणियां की हैं, जबकि उन्हें न तो इस याचिका में पक्षकार बनाया गया और न ही उन्हें सुनवाई का अवसर दिया गया।
बता दे कि एकलपीठ के फैसले के बाद मंजू शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया था, जिसे 15 सितम्बर को राज्यपाल ने मंजूर भी कर लिया हैं।
इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा अपील में कहा गया कि केवल संपर्क का उल्लेख करने वाली चार्जशीट को आधार बनाकर किसी सार्वजनिक अधिकारी की प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाना न्याय का उल्लंघन है।
अदालत की टिप्पणियों ने मंजू शर्मा की ईमानदारी और नैतिक छवि को धूमिल किया है, जिससे उन्हें सामाजिक और पेशेवर स्तर पर नुकसान हुआ, मानसिक तनाव बढ़ा और उन्हें इस्तीफा देने के लिए मजबूर होना पड़ा।
टिप्पणियां संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंखन मंजू शर्मा ने अपील में कहा कि उनके खिलाफ बिना सुनवाई का अवसर दिए व्यक्तिगत टिप्पणियां की गई हैं। जो प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों और भारतीय संविधान के अनुच्छेद 14 और 21 का उल्लंघन है।
उन्होने कहा कि अदालत की टिप्पणियां बिना किसी ठोस साक्ष्य के की गई हैं। कोई ऑडियो रिकॉर्डिंग, प्रत्यक्ष साक्षी विवरण या भर्ती प्रक्रिया के मार्किंग का कोई ऑडिट ट्रेल नहीं है, जो उन्हें दोषी ठहराने के लिए पर्याप्त हो।

हाईकोर्ट की एकलपीठ ने 28 अगस्त को एसआई भर्ती रद्द करने की सिफारिश करते हुए आरपीएससी सदस्यों पर गंभीर टिप्पणियां की थी।
RPSC के पूर्व चेयरमैन से लेकर सदस्यों तक गंभीर आरोप हाईकोर्ट की एकलपीठ ने अपने 28 अगस्त के आदेश में आरपीएससी के तत्कालीन चैयरमेन और सदस्यों पर गंभीर टिप्पणियां की थी। जस्टिस समीर जैन ने अपने फैसले में लिखा था- पूर्व सदस्य रामूराम राईका की बेटी शोभा राईका को एसआई भर्ती के इंटरव्यू में अच्छे अंक मिलें।
इसके लिए राईका ने RPSC के तत्कालीन अध्यक्ष संजय श्रोत्रिय और आरपीएससी के अन्य सदस्यों, जिनमें बाबू लाल कटारा, मंजू शर्मा, संगीता आर्य और जसवंत राठी शामिल थे, उनसे मुलाकात की। राईका ने सिफारिश की कि वे सुनिश्चित करें कि उसकी बेटी साक्षात्कार में पास हो।
इन सदस्यों की भागीदारी आरपीएससी के भीतर प्रणालीगत भ्रष्टाचार का संकेत देती है, जिससे साक्षात्कार और लिखित परीक्षा, दोनों ही चरणों में भर्ती प्रक्रिया की विश्वसनीयता को खतरा पहुंच रहा है।