किसान नेता सरवन सिंह पंधेर ने केंद्र सरकार और प्रधानमंत्री के हालिया बयानों पर कड़ा हमला करते हुए कहा है कि डीजल, पेट्रोल और खाद के उपयोग को कम करने की बातें असल में सरकार की नाकाम विदेश नीति को छिपाने की कोशिश हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार देश हित के नाम पर जनता को भावनात्मक रूप से प्रभावित कर रही है, जबकि देश इस समय गंभीर आर्थिक और कृषि संकट से गुजर रहा है। पंधेर ने कहा कि पिछले कुछ महीनों से डीजल, पेट्रोल और खाद की उपलब्धता और कीमतों को लेकर जो हालात बने हैं, वे सरकार की गलत नीतियों का परिणाम हैं। उन्होंने दावा किया कि रूस से सस्ता तेल और खाद खरीदने का विकल्प होने के बावजूद अमेरिका के दबाव में सरकार ने अलग रास्ता अपनाया, जिससे देश में महंगाई और संकट बढ़ गया। लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देकर पुरानी और नई कृषि नीति की तुलना उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री का उदाहरण देते हुए कहा कि पहले जय जवान, जय किसान के नारे के साथ किसानों को अधिक उत्पादन के लिए खाद और कृषि रसायनों के उपयोग के लिए प्रेरित किया गया था, लेकिन अब सरकार उल्टी दिशा में जा रही है। महंगाई बढ़ने और नई पाबंदियों को लेकर भविष्य की आशंका पंधेर ने यह भी कहा कि आने वाले समय में पेट्रोल, डीजल और खाद की कीमतों में और बढ़ोतरी हो सकती है, और सरकार पहले से ही जनता को इसके लिए मानसिक रूप से तैयार कर रही है। उन्होंने कोविड-19 की नीतियों का जिक्र करते हुए भविष्य में नई पाबंदियों को लेकर भी आशंका जताई।
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