हरियाणा के महेंद्रगढ़ जिला में शेयर बाजार में निवेश पर करोड़ों रुपये का मुनाफा दिलाने का झांसा देकर लाखों रुपये की साइबर ठगी करने वाले अंतरराज्यीय गिरोह का नारनौल साइबर क्राइम थाना पुलिस ने पर्दाफाश किया है। मामले में पुलिस ने दूसरे आरोपी को पंजाब के फरीदकोट से गिरफ्तार किया है। इससे पहले गिरोह के एक अन्य सदस्य को मध्य प्रदेश के ग्वालियर से पकड़ा गया था। पुलिस के अनुसार गिरफ्तार आरोपी की पहचान फरीदकोट निवासी हरीश के रूप में हुई है। रिश्तेदारों के खाते में मंगाता था पैसे आरोपी अपने रिश्तेदारों और जानकारों के नाम पर बैंक खाते खुलवाकर उनमें ठगी की रकम मंगवाता था। इसके बाद वह एटीएम और चेक के माध्यम से नकदी निकालकर अपना कमीशन रखता और बाकी रकम अन्य खातों में ट्रांसफर कर देता था। 15 चेकबुक मिली पुलिस ने आरोपी के कब्जे से 1.25 लाख रुपये नकद, 15 चेकबुक, 6 एटीएम कार्ड, 7 पासबुक, 4 मोबाइल फोन, 4 सिम कार्ड और 2 मोहरें बरामद की हैं। आरोपी को अदालत में पेश कर पुलिस रिमांड पर लिया गया है, ताकि गिरोह के अन्य सदस्यों तक पहुंच बनाई जा सके। झूक निवासी के साथ हुई थी ठगी पुलिस प्रवक्ता सुमित कुमार ने बताया कि महेंद्रगढ़ जिले के गांव झूक निवासी सुंदर कुमार ने साइबर थाना नारनौल में शिकायत दी थी कि शेयर बाजार में निवेश के नाम पर उससे करीब 14.26 लाख रुपये की ठगी की गई। शिकायतकर्ता के अनुसार व्हाट्सएप पर खुद को एक्सिस सिक्योरिटी का अधिकारी बताने वाले लोगों ने उससे संपर्क किया और एक फर्जी ऐप डाउनलोड करवाया। 33 करोड़ रुपए का दिखाया मुनाफा ठगों ने 22 दिसंबर 2025 से 11 मार्च 2026 के बीच अलग-अलग खातों में 14 लाख 26 हजार 50 रुपये जमा करवा लिए। बाद में ऐप में 33 करोड़ रुपये से अधिक का फर्जी मुनाफा दिखाया गया और रकम निकालने के लिए 10 प्रतिशत टैक्स के नाम पर 3.34 करोड़ रुपये की मांग की गई। इसके बाद पीड़ित को ठगी का अहसास हुआ और उसने पुलिस में शिकायत दी। एक हो चुका पहले गिरफ्तार जांच में सामने आया कि ठगी गई रकम में से 6.33 लाख रुपये ग्वालियर स्थित केकेवीआर कंस्ट्रक्शन प्राइवेट लिमिटेड नामक फर्जी कंपनी के खाते में भेजे गए थे। इस खाते के खिलाफ देशभर में आठ शिकायतें दर्ज हैं, जबकि दिल्ली में 96 लाख रुपये की ठगी का मामला भी दर्ज है। पुलिस ने इससे पहले ग्वालियर से पंकज नामक आरोपी को गिरफ्तार किया था। आरोपी पूर्व में कई निजी बैंकों में असिस्टेंट मैनेजर और सेल्स ऑफिसर के पद पर कार्य कर चुका है। आरोप है कि उसने बैंकिंग अनुभव का दुरुपयोग करते हुए फर्जी दस्तावेजों और जाली हस्ताक्षरों के आधार पर कंपनी और बैंक खाते तैयार किए थे। पुलिस को उसके पास से ऑनलाइन बैंकिंग में इस्तेमाल किए जाने वाले सिम कार्ड भी मिले थे।
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