पंजाब पुलिस में अब अपराधियों को पकड़ने के लिए फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी शुरू कर दी गई है, जिससे पुलिस अब अपराधियों को मौके पर ही उनका चेहरा स्कैन कर उनके आपराधिक रिकॉर्ड की पहचान कर सकती है। ऐसा ही मामला मोहाली में सामने आया है। पुलिस जांच के दौरान आरोपी खुद के रिकॉर्ड के बारे में नहीं बता रहा था, लेकिन जब स्पाइस आईडी में उसके चेहरे को स्कैन किया गया तो उसका आपराधिक रिकॉर्ड सामने आ गया। नाकेबंदी के दौरान हुई युवक की पहचान पुलिस ने शनिवार रात मोहाली में नाकेबंदी कर रखी थी। इस दौरान पुलिस को एक संदिग्ध युवक जाता हुआ दिखाई दिया। जब उसे रोका गया तो उसने अपना नाम गलत बताया, लेकिन पुलिस को उस पर शक हो गया। इसके बाद पुलिस ने फेशियल रिकॉग्निशन टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कर उसका रिकॉर्ड निकाला तो पता चला कि उस पर पहले से दो मुकदमे दर्ज हैं। ये दोनों मुकदमे भटिंडा में दर्ज हैं, जिनमें एक नशा तस्करी और दूसरा लड़ाई-झगड़े का मुकदमा है। वह अभी 2 महीने पहले ही जमानत पर बाहर आया था। हालांकि पुलिस ने उससे पूछताछ और जांच के बाद उसे छोड़ दिया। ऐसे काम करता है यह सिस्टम पुलिस ने एआई टेक्नोलॉजी पर आधारित एक सॉफ्टवेयर तैयार किया है, जिसमें अलग-अलग जेलों में बंद सभी अपराधियों की फोटो लेकर उनकी डिटेल डाली गई है। इसमें सॉफ्टवेयर अपराधी के असली फोटो के साथ-साथ आंखों के बीच की दूरी, नाक की बनावट, चेहरे के अन्य बिंदुओं आदि की भी पहचान कर कोड बना लेता है। इसके बाद उसे डेटाबेस में मौजूद रिकॉर्ड के साथ जोड़ दिया जाता है। इसके लिए पुलिस को टीस्कोप जैसे मोबाइल ऐप दिए गए हैं, जिससे वे संदिग्ध की पहचान करते हैं। हर पुलिस टीम को दी गई है डिवाइस इस मामले में मोहाली के डीएसपी हरसिमरन सिंह बल ने बताया कि वह खुद नाके के दौरान मौके पर मौजूद थे। उन्हें इस व्यक्ति पर शक हुआ तो उसकी जांच की गई थी। जांच के दौरान ही उसके आपराधिक रिकॉर्ड के बारे में पता चला।
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