सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को सेना में शॉर्ट सर्विस कमीशन (SSC) में महिला अफसरों को स्थायी कमीशन देने के मामले में सुनवाई की। सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि स्थायी कमीशन न देना उनकी योग्यता की कमी नहीं, बल्कि व्यवस्था में मौजूद भेदभाव का नतीजा था। जस्टिस सूर्यकांत, उज्जल भुयान और एन कोटिस्वर सिंह की बेंच ने कहा कि उनके काम का आकलन इस सोच के साथ किया गया कि उन्हें परमानेंट कमीशन नहीं मिलेगा। कोर्ट ने कहा- जिन महिलाओं को पहले से परमानेंट कमीशन मिल चुका है, वह बना रहेगा। जो अधिकारी केस के दौरान नौकरी से बाहर हो गईं, उन्हें 20 साल की सेवा पूरी मानकर पेंशन दी जाएगी। बेंच ने केंद्र सरकार को आगे के लिए साफ और पारदर्शी चयन प्रक्रिया अपनाने और मूल्यांकन के सभी नियम पहले से बताने का निर्देश दिया, ताकि भविष्य में भेदभाव न हो। कोर्ट रूम लाइव…. सीजेआई: आज 3 मामलों में फैसला सुनाया जा रहा है- आर्मी, नेवी और एयर फोर्स पर… इसके बाद सीजेआई ने एक-एक कर तीनों सेनाओं के मामलों पर आदेश सुनाया… आर्मी मामलों पर CJI नेवी केस में CJI एयर फोर्स केस में CJI सुप्रीम कोर्ट के अहम निर्देश कोर्ट के फैसले पर किसने क्या कहा…
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सुप्रीम कोर्ट बोला-महिला अफसर सेना में स्थायी कमीशन की हकदार: इससे इनकार करना भेदभाव था; 23 साल से केस लड़ रही थीं
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