डिपोर्ट किए गए अर्शदीप सिंह व सुखनाज सिंह।
कनाडा में रंगदारी और आपराधिक मामलों में शामिल पंजाबी मूल के दो गैंगस्टरों अर्शदीप सिंह व सुखनाज को कनाडा बॉर्डर सर्विसेज एजेंसी (CBSA) ने डिपोर्ट कर दिया है। सीबीएसए ने साफ कर दिया कि कनाडा में आपराधिक गतिविधियां करने वाले दूसरे देशों के नागरिकों को
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सीबीएसए ने 18 मार्च को प्रेस विज्ञप्ति जारी कर इस संबंध में जानकारी दी है। सीबीएसए ने रंगदारी व आपराधिक गतिविधियों में शामिल विदेशी नागरिकों की सूची तैयार की है और अब उन्हें कानून प्रक्रिया अपनाकर डिपोर्ट करना शुरू कर दिया। अब तक 35 अपराधियों को डिपोर्ट किया जा चुका है।
सीबीएसए ने कहा है कि हाल ही में रंगदारी में शामिल भारतीय मूल के दो युवकों अर्शदीप सिंह व सुखनाज सिंह संधू को कनाडा से डिपोर्ट कर दिया गया है। दोनों पर कनाडा में रंगदारी मांगने व संगठित अपराध में शामिल होने के आरोप थे।
सांकेतिक फोटो।
पढ़ाई करने गया था, अपराध की दुनिया में उतरा सीबीएसए की रिपोर्ट के मुताबिक, अर्शदीप सिंह साल 2022 में ‘स्टडी परमिट’ पर सुनहरे भविष्य के सपने लेकर कनाडा पहुंचा था। लेकिन जल्द ही वह वहां के आपराधिक गिरोहों के संपर्क में आ गया। नवंबर 2025 में CBSA ने उसे गिरफ्तार किया। जांच में सामने आया कि अर्शदीप जबरन वसूली, फायरिंग, ड्रग तस्करी और अवैध हथियारों के नेटवर्क का हिस्सा था।
IRB ने अर्शदीप सिंह को पब्लिक डेंजर घोषित किया
कनाडा के ‘इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड’ (IRB) ने अर्शदीप सिंह को ‘पब्लिक डेंजर’ घोषित किया। दिसंबर 2025 में उसकी गिरफ्तारी के बाद उसे वापस भेजने का आदेश दिया गया और उसे सुरक्षा घेरे में उसे कनाडा से बाहर निकाल दिया गया।

अर्शदीप सिंह व सुखनाज सिंह
सुखनाज सिंह10 साल बाद डिपोर्ट एक अन्य मामले में सुखनाज़ सिंह संधू, जो 2016 से कनाडा में एक अस्थायी निवासी के रूप में रह रहा था, उसे भी संगठित अपराध में शामिल पाया गया। नवंबर 2025 में गिरफ्तारी के बाद उसे ‘ऑर्गनाइज्ड क्रिमिनैलिटी’ के तहत दोषी पाया गया। उसे भी हाल ही में डिपोर्ट किया गया। अधिकारियों का कहना है कि ये दोनों मामले उन लोगों के लिए चेतावनी है जो कनाडा की धरती का इस्तेमाल अपराध के लिए कर रहे हैं।
गैंगस्टरों को निकालने के लिए कनाडा सरकार की कार्रवाई
- 372 मामलों की जांच, हर हफ्ते 400 लोगों की विदाई: CBSA के ताजा आंकड़ों के अनुसार, एजेंसी ने अब तक 372 इमिग्रेशन इंवेस्टिगेशन शुरू की हैं। इनमें से 70 लोगों के खिलाफ निष्कासन आदेश जारी किए जा चुके हैं और 35 को पहले ही कनाडा से निकाला जा चुका है। एजेंसी का कहना है कि अगस्त 2025 से उन्होंने ‘पैसिफिक’ और ‘प्रेयरी’ क्षेत्रों में जबरन वसूली के मामलों की निगरानी तेज कर दी थी, जिसे नवंबर 2025 में ग्रेटर टोरंटो एरिया (GTA) तक बढ़ा दिया गया। वर्तमान में कनाडा हर हफ्ते औसतन 400 ऐसे लोगों को देश से निकाल रहा है जिनके पास रहने का कानूनी अधिकार नहीं है या जो अपराध में शामिल हैं।
- स्टडी परमिट व वर्क परमिट वालों की जांच: हाल के महीनों में कनाडा में सक्रिय गैंग्स द्वारा भारतीय मूल के व्यापारियों को धमकी भरे कॉल मिलने की शिकायतें बढ़ी थीं। इस कार्रवाई को उन्हीं शिकायतों के जवाब के रूप में देखा जा रहा है। कनाडा सरकार अब ‘स्टडी परमिट’ और ‘वर्क परमिट’ पर आने वाले युवाओं की पृष्ठभूमि की जांच और भी सख्त करने जा रही है।
- 20 हजार अवैध व क्रिमिनल प्रवासियों को निकालेगा कनाड़ा: कनाडा सरकार ने ‘कनाडा बॉर्डर प्लान’ के तहत 30.4 मिलियन डॉलर का बजट आवंटित किया गया है। इसका लक्ष्य सालाना 20,000 अवैध या अपराधी प्रवासियों को वापस भेजना है। इसके अलावा 1,000 नए बॉर्डर अधिकारियों की भर्ती की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है।कनाडा पुलिस। सांकेतिक फोटो
कनाडा से डिपोर्टेशन की प्रक्रिया के 6 स्टेप सिलसिलेवार जानिए..
- अपराधी की पहचान और रिपोर्ट: CBSA को जब किसी विदेशी नागरिक पर शक होता है कि वह कनाडा में क्रिमिनल गतिविधियों में शामिल है और कनाडा के नागरिकों के लिए खतरा बना है तो वो उसकी रिपोर्ट तैयार करते हैं। सीबएसए गंभीर अपराध या संगठित अपराध में संलिप्त, वीजा की अवधि समाप्त होने के बाद रहने वाले, वीजा की शर्तों का उल्लंघन (जैसे स्टडी परमिट पर काम करना) और सुरक्षा कारणों या मानवाधिकार उल्लंघन करने वालों की पहचान करके सेक्शन 44 रिपोर्ट तैयार करता है। यही डिपोर्टेशन की प्रक्रिया का आधार बनती है।
- इमिग्रेशन एंड रिफ्यूजी बोर्ड (IRB) की सुनवाई: गंभीर मामलों गैंगस्टर व सुरक्षा के लिए खतरा पैदा करने वालों के मामले इमीग्रेशन डिवीजन को भेजे जाते हैं। जिसकी सुनवाई एक स्वतंत्र जज करता है। सीबीएसए के अधिकारी सबूत पेश करते हैं कि व्यक्ति ने कानून तोड़ा है।संबंधित व्यक्ति को अपना बचाव करने या वकील रखने का अधिकार होता है।
- यदि आरोप सही पाए जाते हैं, तो ‘रिमूवल ऑर्डर’ जारी किया जाता है।
- रिमूवल ऑर्डर के प्रकार: कनाडा में तीन तरह के आदेश होते हैं। पहला डिपार्चर ऑर्डर होता है जिसके तहत व्यक्ति को 30 दिनों के भीतर स्वेच्छा से देश छोड़ना होता है। दूसरा एक्सक्लूजन ऑर्डर होता है जिसके तहत व्यक्ति को तुरंत छोड़ना होता है और वह 1 या 5 साल तक वापस नहीं आ सकता। तीसरा डिपोर्टेशन ऑर्डर होता है। यह सबसे सख्त माना जाता है। इसके तहत व्यक्ति को स्थायी रूप से प्रतिबंधित कर दिया जाता है। भविष्य में वापस आने के लिए उसे ARC की विशेष अनुमति लेनी पड़ती है।
- हिरासत और गिरफ्तारी: अगर CBSA को लगता है कि व्यक्ति जनता के लिए खतरा है, पहचान संदिग्ध है या वो भाग सकता है तो उसे इमिग्रेशन हिरासत में रखा जाता है। अर्शदीप सिंह और सुखनाज़ संधू के मामले में उन्हें ‘खतरा’ और ‘भागने की आशंका’ के कारण ही हिरासत में रखा गया था।
- अपील और कानूनी विकल्प: निष्कासन आदेश जारी होने के बाद, व्यक्ति के पास कुछ कानूनी विकल्प होते हैं। वह इमिग्रेशन अपील डिवीजन में अपील कर सकता है। इसके अलावा फेडरल कोर्ट में फैसले को चुनौती भी दे सकता है। इसके अतिरिक्त वो प्री रिमूवल रिस्क असेसमेंट के तहत अपने देश लौटने पर जान को खतरा होने की बात कहकर अपील कर सकता है।
- निष्कासन का इंफोर्समेंट : एक बार जब सभी कानूनी विकल्प खत्म हो जाते हैं, तो CBSA निष्कासन की व्यवस्था करता है। यात्रा दस्तावेजों का प्रबंध किया जाता है। अगर व्यक्ति सहयोग नहीं करता, तो उसे सुरक्षा घेरे में हवाई जहाज तक ले जाया जाता है और उसके मूल देश भेजा जाता है।

कनाडा के पब्लिक सेफ्टी मिनिस्टर गैरी आनंद सांगरी
मंत्री का बयान: “सुरक्षा से समझौता नहीं” कनाडा के पब्लिक सेफ्टी मिनिस्ट गैरी आनंद सांगरी ने कहा, “कनाडा में जबरन वसूली और संगठित अपराध के लिए कोई जगह नहीं है। हम उन सभी लोगों को हटा देंगे जो यहां रहने के हकदार नहीं हैं और हमारे समुदायों को नुकसान पहुंचा रहे हैं।”

सीबीएसए की चीफ एरिन ओ गोरमन।
नई तकनीक से तोड़ रहे अपराधियों का नेटवर्क
CBSA की अध्यक्ष एरिन ओ’ गोरमन ने बताया कि पुलिस के साथ साझेदारी और नई तकनीक के दम पर वे अपराधियों के नेटवर्क को तोड़ रहे हैं। उन्होंने जनता से अपील की है कि अगर किसी को भी ऐसे संदिग्धों के बारे में जानकारी मिले, तो वे ‘बॉर्डर वॉच लाइन’ पर सूचना दें।



