राजधानी रांची सहित पूरे प्रदेश में गैस की कमी बरकरार है। अलग-अलग जिलों में गैस एजेंसियों पर लोगों की लाइन सुबह से ही लग जा रही है। गैस की किल्लत का असर घरों पर तो पड़ ही रहा है, वहीं फुड व्यवसाय से जुड़े लोगों को भी प्रभावित कर रहा है। लगभग सभी शहरों में होटल और रेस्टोरेंट कारोबार को बुरी तरह प्रभावित कर दिया है। स्थिति यह है कि करीब 80% बड़े होटल अब इंडक्शन और लकड़ी-कोयले के चूल्हों पर शिफ्ट हो चुके हैं। वहीं छोटे होटलों में गैस नहीं मिलने के कारण होटलों में सन्नाटा पसरा है। मेन्यू में भारी कटौती की गई है। कई जगह चाइनीज और तवा रोटी जैसे आइटम बंद कर दिए गए हैं। होटल संचालकों का कहना है कि यदि जल्द आपूर्ति सामान्य नहीं हुई, तो कई प्रतिष्ठान बंद होने की कगार पर पहुंच जाएंगे। कर्मचारियों को दी गई छुट्टी, बढ़े खाने के दाम गैस संकट का असर रोजगार पर भी दिखने लगा है। काम कम होने के कारण करीब 20% कर्मचारियों को छुट्टी दे दी गई है। रांची के स्टेशन रोड समेत अन्य इलाकों के होटलों में खाने के दाम 15% तक बढ़ चुके हैं। संचालकों के अनुसार, लागत बढ़ने और सीमित मेन्यू के कारण ग्राहकों की संख्या भी घट रही है। व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यही हाल रहा तो स्थिति और गंभीर हो सकती है। बात लौह नगरी जमशेदपुर की करें तो यहां भी गैस संकट का असर साफ दिख रहा है। कॉमर्शियल सिलेंडर नहीं मिलने से कई कैंटीनें बंद हो गई हैं। गोलमुरी की एक प्रमुख कैंटीन पिछले चार दिनों से बंद है। यहां रोज 400-500 लोग भोजन करते थे। वहीं बिष्टुपुर की कैंटीन में रोटी, चाय और कॉफी जैसे आइटम हटा दिए गए हैं। संचालकों का कहना है कि लकड़ी पर बड़े पैमाने पर खाना बनाना संभव नहीं है, जिससे संचालन मुश्किल हो गया है। फूड डिलीवरी और गिग वर्कर्स पर असर एलपीजी संकट का असर ऑनलाइन फूड डिलीवरी सेवाओं पर भी पड़ा है। रेस्टोरेंट और क्लाउड किचन का मेन्यू सीमित होने से ऑर्डर 50 से 60% तक घट गए हैं। गिग वर्कर्स के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। जहां पहले उन्हें दिनभर में 30 ऑर्डर मिलते थे, वहीं अब यह घटकर 5 से 10 रह गए हैं। अधिक गैस खपत वाले व्यंजन मेन्यू से हटाए जा चुके हैं। गिरिडीह में घरेलू गैस सिलेंडर की भारी किल्लत से लोग परेशान हैं। गैस एजेंसियों के बाहर सुबह से लंबी कतारें लग रही हैं, लेकिन कई उपभोक्ताओं को सिलेंडर नहीं मिल पा रहा। लोग दो-दो दिन लाइन में लगने के बाद भी खाली हाथ लौट रहे हैं। ओटीपी नहीं मिलने की शिकायतें भी सामने आ रही हैं। उपभोक्ताओं ने एजेंसियों की व्यवस्था सुधारने और प्रशासन से हस्तक्षेप की मांग की है, ताकि आपूर्ति सुचारू हो सके और आम जनता को राहत मिल सके। धनबाद में उपभोक्ताओं का फूटा गुस्सा धनबाद के झरिया स्थित बस्ताकोला में रसोई गैस की किल्लत को लेकर उपभोक्ताओं का गुस्सा सड़क पर देखने को मिला। चौधरी गैस एजेंसी के बाहर सुबह से ही लोगों की लंबी कतार लगी रही, लेकिन घंटों इंतजार के बावजूद सिलेंडर नहीं मिलने से नाराज लोगों ने धनबाद-झरिया मुख्य मार्ग को जाम कर दिया। उपभोक्ताओं का आरोप है कि एजेंसी द्वारा गैस की कालाबाजारी की जा रही है। उन्हें पिछले दो-तीन दिनों से बार-बार बुलाने के बावजूद सिलेंडर नहीं दिया जा रहा है। कई लोग खाली सिलेंडर लेकर घंटों लाइन में खड़े रहे, जिससे उनकी परेशानी और बढ़। कोडरमा में सामान्य होने की ओर हालात वहीं, कोडरमा में गैस किल्लत की स्थिति धीरे-धीरे सामान्य होने लगी है। झुमरीतिलैया शहर में गैस गोदाम के बाहर हल्की भीड़ जरूर देखी जा रही है, लेकिन अन्य क्षेत्रों में उपभोक्ताओं की संख्या में कमी आई है। उपायुक्त के निर्देश पर सभी प्रखंडों में एलपीजी सिलेंडर की कालाबाजारी रोकने और समस्याओं के समाधान के लिए दंडाधिकारियों की नियुक्ति की गई है। इसी क्रम में जयनगर सीओ सारांश जैन ने विभिन्न गैस एजेंसियों का निरीक्षण कर उपभोक्ताओं की समस्याओं की जानकारी ली। उन्होंने एजेंसी संचालकों को सख्त निर्देश दिया कि किसी भी प्रकार की कालाबाजारी बर्दाश्त नहीं की जाएगी और जिन उपभोक्ताओं की बुकिंग पहले हुई है, उन्हें प्राथमिकता के आधार पर सिलेंडर उपलब्ध कराया जाए। साथ ही 15 मार्च तक लंबित बैकलॉग को खत्म करने का निर्देश भी दिया गया है।
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रांची, जमशेदपुर, गिरिडीह में गैस संकट बरकरार: होटलों में मेन्यू हुआ छोटा, ऑनलाइन डिलीवरी पर असर, कर्मचारियों को दी गई छुट्टी – Giridih News
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