भारतीय शिक्षण मंडल एवं स्कूल क्रांति संघ के संयुक्त तत्वावधान में वर्ष 2026 का व्याख्यान कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में जय नारायण व्यास विश्वविद्यालय के व्याख्याता गजे सिंह उपस्थित रहे, जबकि मुख्य वक्ता के रूप में सहक
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मुख्य वक्ता महेंद्र दवे ने अपने उद्बोधन में कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र की आत्मा होती है। जिस देश की शिक्षा व्यवस्था कमजोर होती है, वहां विकास की गति भी प्रभावित होती है। वहां के संस्कार की कमी के कारण माता पिता वृद्धावस्था में अभावग्रस्त जीवन जीने को मजबूर हो जाते हैं, उच्च शिक्षा के बाद बच्चे विदेशो में बसते हैं, और माता-पिता के अंतिम संस्कार करने भी नहीं आते। उन्होंने कहा कि शिक्षा ही देश की रीढ़ है और यही समाज में संस्कार, संस्कृति तथा विकास को दिशा देती है।
संयुक्त परिवार बिखर रहे
डाइट प्रिंसिपल मंजू शर्मा ने अपने विचार रखते हुए कहा कि जब उन्होंने जोधपुर में अपनी सेवा प्रारंभ की थी, तब यहां कोई वृद्धाश्रम नहीं था, जबकि आज लगभग साठ से सत्तर वृद्धाश्रम संचालित हो रहे हैं। उन्होंने इसे समाज में संस्कारों की कमी और संयुक्त परिवार व्यवस्था के टूटने का परिणाम बताया। उन्होंने कहा कि आज बच्चे मोबाइल पर क्या देख रहे हैं, इस पर अभिभावकों का पर्याप्त ध्यान नहीं है, जिसके दुष्परिणाम सामने आने लगे हैं।
RTE में कई समस्याओं का करना पड़ रहा है सामना
वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष जोगेंद्र गौर ने निजी विद्यालयों के संचालन में आ रही समस्याओं पर प्रकाश डालते हुए बताया कि राइट टू एजुकेशन (Right to Education Act) लागू होने के बाद निजी विद्यालयों को कई प्रशासनिक कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है। विद्यालयों को समय पर भुगतान नहीं मिल पाता और अनेक सुविधाएं भी उपलब्ध नहीं हैं। उन्होंने कहा कि आरटीई पोर्टल के रखरखाव के नाम पर शुल्क लिया जाता है, लेकिन उसमें आवश्यक सुविधाओं का अभाव है, जबकि सरकारी विद्यालयों को कई सुविधाएं निःशुल्क उपलब्ध हैं।
मुख्य अतिथि गजे सिंह ने अपने संबोधन में कहा कि राजस्थानी भाषा, जो राजस्थान के लोगों की मातृभाषा है, उसके साथ उपेक्षा का व्यवहार हो रहा है। उन्होंने कहा कि National Education Policy 2020 में प्राथमिक शिक्षा मातृभाषा में देने की बात कही गई है, लेकिन राजस्थानी भाषा को अभी तक मान्यता नहीं मिली है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक शोधों में भी यह सिद्ध हो चुका है कि मातृभाषा में शिक्षा प्राप्त करने से बच्चों का मानसिक विकास अधिक प्रभावी ढंग से होता है।
प्रांतीय मंत्री चंडीदान ने भारतीय शिक्षण मंडल की कार्यप्रणाली पर प्रकाश डाला और विद्यालय संचालकों को भारतीय शिक्षण मंडल की गतिविधियों से अवगत कराया। कार्यक्रम के अंत में दिनेश शर्मा ने सभी विद्यालय संचालकों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम की व्यवस्थाओं के लिए मदर टेरेसा स्कूल के संचालक धीरेंद्र गहलोत का विशेष धन्यवाद दिया गया। मंच संचालन पूनम ने किया। कार्यक्रम में , डाइट प्रिंसिपल मंजू शर्मा, वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष स्कूल क्रांति संघ जोगेंद्र गौड़, प्रांतीय मंत्री चंडीदान तथा दिनेश शर्मा उपस्थित रहे।
इसमें धर्मेंद्र कछवाह, रामचंद्र कुड़िया, गोबर सिंह कछवाह, कंवरा राम, महिपाल सोऊ, चिमनाराम देदड़, दीपक चौधरी, नंद सिंह भाटी, मनोहर सिंह खुरियाला, गुलाब राव, रामकिशोर देवड़ा, संपत सुथार, सुरेंद्र मेवाड़ा, धर्मचंद सिशोदिया, महेन्द्र पटेल, नारायण पटेल, डूंगर सिंह गहलोत सहित अनेक विद्यालय संचालकों ने भाग लिया



