इंदौर में गैस संकट गहराया, सराफा बाजार में रौनक घटी:  चौपाटी में इंडक्शन पर तले जा रहे भजिए, इलेक्ट्रिक ग्रिल में बन रहे सैंडविच – Indore News

इंदौर में गैस संकट गहराया, सराफा बाजार में रौनक घटी: चौपाटी में इंडक्शन पर तले जा रहे भजिए, इलेक्ट्रिक ग्रिल में बन रहे सैंडविच – Indore News




इंदौर की चमक-दमक वाली सराफा चौपाटी और मशहूर फूड हब्स पर अब कमर्शियल एलपीजी गैस संकट का साया गहरा गया है। मिडिल ईस्ट (ईरान-अमेरिका तनाव) से उपजे वैश्विक ईंधन संकट के चलते कमर्शियल गैस सिलेंडरों की सप्लाई पर प्रशासनिक रोक लग गई है, जिससे शहर के स्ट्रीट फूड और रेस्तरां कारोबार प्रभावित हो रहा है। पहले जहां सराफा बाजार की रातें गरमागरम भुट्टे, गराडू, भजिए और पोहा-जलेबी की खुशबू से महकती थीं, अब वहां की रौनक फीकी पड़ गई है। सराफ बाजार के कई दुकानदारों ने गैस की कमी से जूझते हुए इंडक्शन चूल्हे और इलेक्ट्रिक ग्रिल का सहारा ले लिया है। चौपाटी पर अब पारंपरिक गैस पर तले जाने वाले कुरकुरे भजिए इंडक्शन पर तलकर परोसे जा रहे हैं, जबकि सैंडविच और ग्रिल्ड आइटम्स इलेक्ट्रिक ग्रिल पर बनाए जा रहे हैं। एक स्थानीय दुकानदार ने बताया कि गैस सिलेंडर नहीं मिल रहा तो क्या करें? ग्राहक आएंगे तो कुछ तो परोसना पड़ेगा। स्वाद में आया फर्क इंडक्शन पर भजिए तल रहे हैं, स्वाद में थोड़ा फर्क है लेकिन काम चल रहा है। छप्पन दुकान जैसे लोकप्रिय स्पॉट्स पर भी यही हाल है। व्यापारी जुगाड़ कर रहे हैं, लेकिन भीड़ पहले जितनी नहीं दिख रही। बता दें कि शहर में कमर्शियल गैस की आपूर्ति पिछले कुछ दिनों से ठप है, जबकि घरेलू सिलेंडरों पर भी बुकिंग में देरी और 25 दिनों का नियम लागू होने से आमजन परेशान हैं। होटल-कैटरिंग सेक्टर पर सबसे ज्यादा असर पड़ा है, कई जगह शादियों-समारोहों में भी खाने-पीने की व्यवस्था प्रभावित हो रही है। प्रशासन का कहना है कि स्थिति अस्थायी है और जल्द सुधार होगा, लेकिन फिलहाल इंदौर की स्वादिष्ट गलियों में ‘इंडक्शन क्रांति’ छा गई है। सिलेंडर नहीं मिले तो जल्द ही दुकानों पर ताले लग जाएंगे कमर्शियल सिलेंडर पर रोक लगाने के कंपनियों के फैसले का सीधा असर होटल, रेस्टाेरेंट, छोटे खान-पान कारोबारी, छोटे-छोटे उद्योगों व शादियों पर दिखने भी लगा है। केटरर्स, रेस्टारेंट व खान-पान कारोबारियों का कहना है, यदि सिलेंडर नहीं मिले तो जल्द ही दुकानें पर ताले लगना शुरू हो जाएंगे। शुक्रवार से छोटी होटल व खाने पीने की दुकान चलाने वालों की स्थिति खराब होने लगी है। उनका कहना है जब से स्वच्छता अभियान चल रहा है, धुआं रहित ईंधन पर जोर दे रहे हैं। तंदूर, सिगड़ी, डीजल भट्टी पर प्रतिबंध होने से कमर्शियल एलपीजी सिलेंडर का उपयोग करते हैं। डीजल भट्टी की उपलब्धता भी आसान नहीं लाबरिया भेरू क्षेत्र में चाय की दुकान चला रहे दुकानदार का कहना है कि यह सिलेंडर एक दो दिन साथ देगा। इसके बाद सोचेंगे, फिलहाल तो वैकल्पिक ईंधन या संसाधन की भी व्यवस्था नहीं है। प्रशासन व सरकार का तर्क है कि वैकल्पिक तरीकों का उपयोग करें। यह इतना आसान नहीं है। कैरोसिन उपलब्ध नहीं है, डीजल भट्टी की उपलब्धता भी आसानी से नहीं होगी। सभी के पास तो यह है नहीं। तीसरा विकल्प इलेक्ट्रिक क्वाइल या इंडक्शन का है। इसके लिए भी बिजली कनेक्शन की व्यवस्था करना होगी। सामान बनाने में देरी लगती है। सेक्टर, जिन्हें सबसे ज्यादा जरूरत सिलेंडर की बाजार में इंडक्शन और इलेक्ट्रिक चूल्हों की भारी मांग इंदौर में घरेलू इंडक्शन, इलेक्ट्रिक चूल्हा की मांग बढ़ गई है। इंडक्शन निर्माताओं को भी इतनी मांग का अंदाजा नहीं था। ऐसे में बाजार की मांग को इंडक्शन निर्माता पूरा नहीं कर पा रहे हैं। दुकानदारों के अनुसार पिछले कुछ दिनों में जो बिक्री महीनेभर में होती थी, वह अब दो-तीन दिन में हो रही है। घरेलू उपभोक्ताओं के साथ-साथ होटल, रेस्तरां और छोटे व्यवसायी भी कमर्शियल इलेक्ट्रिक उपकरण खरीद रहे हैं। इंडक्शन के साथ ही राइस कुकर, इलेक्ट्रिक प्रेशर कुकर और एयर फ्रायर की भी मांग बढ़ी है। होटल व रेस्टोरेंट के लिए पांच से छह किलोवाट इंडक्शन की डिमांड घरेलू उपयोग वाले इंडक्शन की क्षमता डेढ़ से दो किलोवाट की होती है। होटल व रेस्टोरेंट में 25 से 30 किलो की खाद्य सामग्री एक बार में तैयार की जाती है। ऐसे में यहां पर पांच से छह किलोवाट के कमर्शियल इंडक्शन की डिमांड बढ़ी है। इंदौर शहर के रेस्टोरेंट व होटल ही नहीं, आसपास के ग्रामीण इलाकों से होटल व ढाबा संचालक भी इंडक्शन की तलाश में इंदौर के बाजारों के चक्कर काट रहे हैं।



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