इस ऑडिट पैरा के आधार पर निगम ने अब तक 30 से ज्यादा लोगों को नोटिस थमाए हैं। अब तक करीब 2 करोड़ रुपए की वसूली की जा चुकी है।
उदयपुर नगर निगम में करीब 2 साल पहले पट्टों के आवंटन में कई गड़बडियां हुई थी। अब इसका खुलासा ऑडिट रिपोर्ट में हो गया है। भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (कैग) की टीम ने पिछले दिनों जब नगर निगम के रिकॉर्ड खंगाले, तो भारी गड़बड़ियां पकड़ में आईं है। इस ऑडि
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दरअसल, यह पूरा मामला साल 2022-23 और 2023-24 के दौरान जारी किए गए पट्टों से जुड़ा है। ऑडिट में यह बात सामने आई है कि गोवर्धन विलास जैसे पॉश इलाकों के साथ ही शहर के कई अन्य महत्वपूर्ण स्थानों पर नियमों को ताक पर रखकर जमीनों के पट्टे बांटे गए।
जानकारी के अनुसार, नगर निगम ने शहर की बेशकीमती जमीनों को बिना किसी नीलामी प्रक्रिया के ही फ्री-होल्ड पट्टे के रूप में जारी कर दिया। कायदे से इन जमीनों की नीलामी कर राजस्व जुटाया जाना चाहिए था, लेकिन ऐसा नहीं करके सीधे पट्टे दे दिए गए।
उदयपुर नगर निगम में पट्टे जारी करने में करोड़ों की गड़बड़ियां हुई हैं।
वसूलने में भारी लापरवाही बरती गई इतना ही नहीं, पट्टे जारी करने के दौरान लैंड यूज चेंज फीस, लीज की राशि और जीएसटी तक वसूलने में भारी लापरवाही बरती गई। कैग की रिपोर्ट के अनुसार, इन शुल्कों की वसूली नहीं होने से सरकारी खजाने को 5 करोड़ रुपए से ज्यादा का बड़ा आर्थिक नुकसान हुआ है।
ऑडिट में इन कमियों पर आपत्ति जताए जाने के बाद नगर निगम प्रशासन अब पूरी तरह सक्रिय हो गया है। नगर निगम की ओर से लगातार उन लोगों को नोटिस भेजे जा रहे हैं, जिनके पट्टों में ये गड़बड़ियां मिली थीं।
रिमाइंडर नोटिस भी जारी किए जा चुके निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना ने बताया- जिन लोगों को नोटिस दिए गए थे, उनमें से कई ने जरूरी दस्तावेज और बकाया राशि जमा करवा दी है। हालांकि, कुछ लोग अब भी जवाब देने से बच रहे हैं या उचित दस्तावेज पेश नहीं कर रहे हैं। ऐसे लोगों को निगम प्रशासन की ओर से दो से तीन बार रिमाइंडर नोटिस भी जारी किए जा चुके हैं।
2 करोड़ रुपए से अधिक की रिकवरी हो चुकी
फिलहाल 2 करोड़ रुपए से अधिक की रिकवरी हो चुकी है, लेकिन निगम का लक्ष्य पूरी राशि वसूल करना है। निगम के अधिकारी अब इन बकाया मामलों में सख्ती बरतने की तैयारी कर रहे हैं ताकि सरकारी राजस्व की भरपाई हो सके और ऑडिट की आपत्तियों का पूरी तरह निस्तारण किया जा सके।
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राजस्थान के शहरी निकाय में पट्टे जारी करने से लेकर ठेके देने और दूसरे कामों में भारी गड़बड़ियां मिलीं हैं। जयपुर, कोटा, उदयपुर नगर निगम और जयपुर विकास प्राधिकरण (JDA) के अलावा कई शहरी निकायों में भारत के नियंत्रक महालेखा परीक्षक (CAG) ने ऑडिट में धांधलियां पकड़ी हैं। पढ़ें पूरी खबर



