पीटर बेकर. द न्यू यॉर्क टाइम्स16 मिनट पहले
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डोनाल्ड ट्रम्प ने 2016 में कहा था- हम शासन बदलने की बेकार और खर्चीली नीति बंद करने वाले हैं। – फाइल फोटो
डोनाल्ड ट्रम्प ने 2016 के अपने पहले राष्ट्रपति चुनाव में कहा था कि सैन्य अभियानों से शासन में किया गया परिवर्तन पूरी तरह विफल साबित होता है। साथ ही विदेशी सरकारों को गिराने की होड़ बंद करने की बात कही थी। 2024 के चुनाव में जंग न छेड़ने का दावा किया था। यह भी कहा था कि यदि कमला हैरिस जीतेंगी तो वे निश्चित तौर पर हमें दूसरे विश्व युद्ध में झोंक देंगीं।
चुनाव जीतने के बमुश्किल एक साल बाद ही ट्रम्प विदेशी शासनों को उखाड़ फेंकने की होड़ में जुट गए हैं। उन्होंने सरकार हटाने के एकमात्र लक्ष्य के लिए ईरान में अमेरिका की पूरी फौजी ताकत लगा दी है। अमेरिका फर्स्ट पर फोकस का वादा करके सत्ता में आए ट्रम्प विदेशों में ताकत दिखा रहे हैं। ईरान को मिलाकर ट्रम्प ने अपने दूसरे कार्यकाल में नौंवी बार सैनिक कार्रवाई का आदेश दिया है।
उन्होंने वेनेजुएला में सरकार गिरा दी है। क्यूबा के तानाशाह का तख्ता पलटने की धमकी दी है। नई जंग की घोषणा के बारे में अपने सोशल मीडिया वीडियो में ट्रम्प ने ईरान के पिछले करीब पचास सालों का ब्योरा दिया है। इसमें ईरान द्वारा परमाणु हथियार, बैलिस्टिक मिसाइल बनाने, अमेरिका और सहयोगियों पर हमला करने वाले आतंकवादी गुटों का समर्थन, 1979 में तेहरान में अमेरिकी दूतावास पर कब्जा और अभी हाल में पुलिस के हाथों ईरानी प्रदर्शनकारियों के जनसंहार जैसी घटनाएं शामिल हैं, लेकिन उन्होंने नहीं बताया कि इन आक्रामक कार्रवाइयों पर पहले की बजाय अब कार्रवाई की जरूरत क्यों पड़ी है।
ट्रम्प ईरानी खतरे के संबंध में अपने विरोधाभासी बयानों को स्पष्ट नहीं कर सके हैं। पिछले साल इजराइल के साथ ईरान पर हमले के बाद उन्होंने कहा कि हमने इस देश का परमाणु कार्यक्रम खत्म कर दिया है। इसे कई बार दोहराया भी, लेकिन उन्होंने ये नहीं बताया कि जो कार्यक्रम पहले ही खत्म हो चुका है, उस पर हमला करने की क्या जरूरत थी।
कैटो इंस्टीट्यूट में विदेश नीति अध्ययन के रिसर्चर ब्रेंडन बक का कहना है कि ईरान में शासन परिवर्तन का घोषित लक्ष्य उनके 2016 के विचारों के खिलाफ है। ट्रम्प के आलोचकों ने उन पर अपने वादों को भुलाने का आरोप लगाते हुए उनके पिछले बयानों की याद दिलाई है।
पिछले एक साल में ट्रम्प का सार्वजनिक रुख बदला है। वे किसी समय स्वयं को ऐतिहासिक शांति निर्माता के बतौर पेश करते हैं। अफसोस जताते हैं कि उन्हें नोबेल शांति पुरस्कार नहीं मिला। ईरान सहित आठ युद्धों को खत्म कराने का दावा करते हैं। वे अगले क्षण ग्रीनलैंड पर कब्जे, पनामा नहर हासिल करने, क्यूबा को दबाने और वेनेजुएला के समान कोलंबिया के राष्ट्रपति को पकड़ने की धमकी देते हैं।
भाषणों में इस तरह युद्ध का विरोध करते रहे ट्रम्प
ट्रम्प ने कई भाषणों में युद्ध का विरोध किया है। इनमें से कुछ ये हैं-
2012- अब जनमत सर्वेक्षणों में ओबामा की लोकप्रियता में गिरावट आ रही है तो देखिए कि वे लीबिया या ईरान पर हमला करेंगे। वे आमादा हैं। 2013- याद करें मैंने बहुत पहले कहा था कि राष्ट्रपति ओबामा ईरान पर हमला करेंगे क्योंकि उनमें ठीक से बातचीत करने का हुनर नहीं है। 2016- हम शासन बदलने की बेकार और खर्चीली नीति बंद करने वाले हैं। 2024- मैं युद्ध शुरू नहीं करने वाला हूं। मैं तो जंग रोकूंगा।
कुछ समर्थक भी जता रहे विरोध
ट्रम्प की आलोचना करने वालों में सिर्फ उदारवादी नहीं बल्कि ट्रम्प के मेक अमेरिका ग्रेट अगेन आंदोलन के प्रमुख नेता भी शामिल हैं। उनकी शिकायत है, वे जिन लोगों को कभी ठुकराते थे, अब उनके कब्जे में हैं। दक्षिणपंथी पॉडकास्ट होस्ट टकर कार्लसन और जॉर्जिया की रिपब्लिकन नेता मार्जोरी टेलर ग्रीन ने ट्रम्प पर प्रहार किए हैं।
आक्रामक सलाहकारों की टीम
ट्रम्प ने पहले कार्यकाल में अनुभवी रिपब्लिकन नेताओं या सैनिक अधिकारियों की टीम बनाई थी। यह टीम अक्सर उनके आक्रामक तेवरों को शांत करती थी, लेकिन इस बार जॉन केली, जिम मैटिस, मार्क एस्पर या मार्क मिली जैसे लोगों के बजाय रक्षा मंत्री पीट हेगसेथ, विदेश मंत्री मार्को रूबियो और व्हाइट हाउस की चीफ ऑफ स्टाफ सुसी वाइल्स जैसे आक्रामक सलाहकार हैं। ये लोग राष्ट्रपति की इच्छा को आगे बढ़ाने में यकीन रखते हैं।




