हनुमानगढ़ जिले की पीलीबंगा तहसील के बड़ोपल बारानी क्षेत्र में करीब 8 हजार बीघा जीडीसी (सिंचाई विभाग) भूमि को वन विभाग के नाम ‘डिम्ड फॉरेस्ट’ घोषित करने की तैयारी चल रही है।
इस निर्णय से लगभग 500 किसानों के प्रभावित होने की आशंका है। भारतीय किसान संघ ने इस संबंध में जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर निर्णय पर पुनर्विचार की मांग की है। किसान संघ के अनुसार, जिन खसरों की भूमि वन विभाग को हस्तांतरित करने का प्रस्ताव है, उनके बीच में किसानों की निजी खातेदारी जमीन भी स्थित है। अधिकांश किसान छोटे जोत वाले हैं और उनकी आजीविका का एकमात्र साधन यही कृषि भूमि है। यदि इस क्षेत्र को वन घोषित किया जाता है, तो किसानों को खेतों तक पहुंचने के रास्ते, विद्युत लाइन, सिंचाई व्यवस्था और तारबंदी जैसी समस्याओं का सामना करना पड़ेगा। इसके साथ ही आवारा पशुओं की समस्या भी बढ़ सकती है। किसानों के विस्थापन का खतरा पैदा हो रहा
संघ के पदाधिकारियों ने बताया कि यह क्षेत्र ऐतिहासिक रूप से बाढ़ प्रभावित रहा है, जहां कभी अत्यधिक पानी आता है तो कभी कई वर्षों तक सूखा रहता है। इसके बावजूद किसानों ने कभी विरोध नहीं किया। उनका तर्क है कि एक ओर सरकार विकास कार्यों के तहत सड़कें, स्कूल और बिजली कनेक्शन उपलब्ध करा रही है, वहीं दूसरी ओर भूमि को वन क्षेत्र घोषित करने से किसानों के विस्थापन का खतरा उत्पन्न हो रहा है। किसानों के हित में निर्णय बदलने की मांग
भारतीय किसान संघ ने प्रशासन से अपील की है कि किसानों के हितों को ध्यान में रखते हुए इस निर्णय को बदला जाए, ताकि भविष्य में किसी भी प्रकार के विवाद या टकराव की स्थिति से बचा जा सके। इस अवसर पर पीलीबंगा के पूर्व विधायक धर्मेंद्र मोची, भारतीय किसान संघ के जिला मंत्री हरीश पचार, तहसील अध्यक्ष सुरेन्द्र सिंवर, रामप्रताप कस्वां और आयुष कस्वां सहित कई पदाधिकारी उपस्थित थे।
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8 हजार बीघा जमीन वन विभाग को देने का विरोध: 500 किसान होंगे प्रभावित, कलेक्टर से निर्णय बदलने की मांग – Hanumangarh News
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