चंडीगढ़ रोज फेस्टिवल में 132 लोगों का अंगदान का फैसला:  इनमें हरियाणा-पंजाब और चंडीगढ़ के लोग, कई कपल दूसरों के लिए प्रेरणा बने – Chandigarh News

चंडीगढ़ रोज फेस्टिवल में 132 लोगों का अंगदान का फैसला: इनमें हरियाणा-पंजाब और चंडीगढ़ के लोग, कई कपल दूसरों के लिए प्रेरणा बने – Chandigarh News




चंडीगढ़ में चल रहे रोज फेस्टिवल को देखने आए लोगों ने अंगदान करने में भी दिलचस्पी दिखाई है। दो दिन में अब तक 139 लोगों ने अंगदान करने का संकल्प लिया है। उन्होंने इस संबंध में दस्तावेज भरे हैं। अंगदान के दस्तावेज भरने वालों में केवल चंडीगढ़ के ही लोग नहीं थे, बल्कि हरियाणा, हिमाचल और पंजाब से संबंधित लोग भी शामिल थे। रीजनल ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गनाइजेशन (ROTTO) के नोडल अधिकारी प्रो. विपिन कौशल ने कहा, “रोज़ फेस्टिवल जीवन और नवजीवन का प्रतीक है। यह देखकर अत्यंत संतोष हुआ कि नागरिकों ने इसी भावना को अपनाते हुए दूसरों को जीवन देने का संकल्प लिया। हर प्रतिज्ञा आशा और सहानुभूति का सशक्त संदेश है।” लंबे समय से अंग दान करने की सोच रही थी इस मौके पर बबीता अरोड़ा ने अपने पति के साथ अंगदान की प्रतिज्ञा लेते हुए कहा कि वे लंबे समय से यह निर्णय लेना चाहती थीं और रोज फेस्टिवल ने उन्हें यह कदम उठाने का अवसर दिया। डेराबस्सी की दीया ने भी संकल्प पत्र भरते हुए अपने मित्रों को आगे आने के लिए प्रेरित किया और अंगदान को “जीवन से परे की जिम्मेदारी” बताया। इसी तरह बलटाना के पिंडर सिंह, मोहाली के चरणजीत सिंह, चंडीगढ़ के राजेश कुमार और पटियाला के मयंक कठैत ने भी संकल्प लेते हुए इसे “किसी को जीवन का दूसरा अवसर देने की दिशा में छोटा लेकिन महत्वपूर्ण कदम” बताया। सभी ने एक स्वर में कहा कि अंगदान करुणा की स्थायी विरासत है। हिसार की मंजू और संदीप ने भी फैसला लिया हिसार के मंजू और संदीप कुमार ने साथ मिलकर संकल्प लिया और परामर्शदाताओं से विस्तृत चर्चा की। उन्होंने कहा कि अंगदान मानवता की सच्ची भावना को दर्शाता है और वे अपने परिवार में भी इस विषय पर संवाद शुरू करेंगे। अंबाला के विकास मल्होत्रा ने जानना चाहा कि क्या अंगदान से परिवार पर कोई आर्थिक बोझ पड़ेगा। रोहतक की शालिनी मेहता ने अंग आवंटन और प्रतीक्षा सूची की पारदर्शिता को लेकर सवाल उठाए। होशियारपुर के गुरप्रीत सिंह ने दुरुपयोग और व्यावसायिक शोषण रोकने के प्रावधानों के बारे में जानकारी ली। सभी प्रश्नों का विस्तृत और संतोषजनक उत्तर दिया गया तथा बताया गया कि भारत में अंगदान सख्त कानूनी एवं नैतिक ढांचे के अंतर्गत पारदर्शी प्रणाली से संचालित होता है। संकल्प लेने वाले नागरिकों को सम्मान स्वरूप प्रशंसा प्रमाण पत्र, स्मृति चिन्ह और जागरूकता सामग्री प्रदान की गई, जिससे इस निर्णय को उत्सव का रूप मिला।



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