पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: हम अपने बच्चों को तभी बचा पाएंगे जब खुद सावधान होंगे


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6 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता

दुनियाभर के बाजार आज एआई में जमकर निवेश कर रहे हैं। दीवानों ने दर्द को ही दवा बना लिया है। हर बात का निदान एआई में ढूंढा जा रहा है। हमारे यहां दो स्तरों पर एआई से जुड़कर काम होना चाहिए- एक देश के स्तर पर, दूसरा परिवार के लिए।

एआई से विकास तो हो, लेकिन ये तकनीक देश से काम को कम ना कर दे, वरना काम करने वाले और बेरोजगार हो जाएंगे। एआई को लेकर अमेरिका और चीन में जमकर मुकाबला चल रहा है। इन दोनों ही देशों में परिवार का ढांचा बिखरा हुआ है। तो हमें एआई से बाजार में फायदा हो, ऐसा तो सोचना है, लेकिन परिवार की सुरक्षा पर भी चिंतन करना है।

पूरी दुनिया के देश शायद परिवार संस्था को लेकर इतने गम्भीर ना हों, पर हम भारतीयों को चाहिए कि एआई की चपेट में हमारी गृहस्थी ना आ जाए, दाम्पत्य जीवन बिखर ना जाए। क्योंकि हम एआई से बच्चों को तब बचा पाएंगे, जब माता-पिता खुद सावधान हों। आज तो बारूद के ढेर की हिफाजत चिंगारी के हाथ में दे दी गई, ऐसा दृश्य देखने में आ रहा है।

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