एमबीआर कॉलेज की 29 बीघा जमीन आवंटन का विरोध:  रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में उठाया मुद्दा, एनओसी रद्द करने की मांग – Balotra News

एमबीआर कॉलेज की 29 बीघा जमीन आवंटन का विरोध: रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में उठाया मुद्दा, एनओसी रद्द करने की मांग – Balotra News




शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने विधानसभा में एमबीआर पीजी महाविद्यालय, बालोतरा की भूमि के आवंटन का मुद्दा उठाया। उन्होंने ध्यानाकर्षण प्रस्ताव प्रस्तुत किया, जिसमें कॉलेज की जमीन को अन्य सरकारी कार्यालयों के भवन निर्माण के लिए आवंटित किए जाने पर आपत्ति जताई गई। कॉलेज की 29 बीघा जमीन को आवंटित करने का विरोध कॉलेज के पास कुल लगभग 85 बीघा भूमि है। आरोप है कि कॉलेज शिक्षा आयुक्तालय ने इस भूमि में से लगभग 29 बीघा जमीन को अन्य सरकारी उपयोगों के लिए आवंटित करने के लिए अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी कर दिया है। आवंटित की गई 29 बीघा भूमि में से लगभग 24 बीघा जमीन महाविद्यालय परिसर की चारदीवारी के भीतर स्थित खेल मैदान की है। शेष लगभग 5 बीघा भूमि परिसर के बाहर, सड़क मार्ग के निकट स्थित है। विधायक भाटी ने इस आवंटन को हजारों विद्यार्थियों के भविष्य और शैक्षणिक संभावनाओं के लिए महत्वपूर्ण बताया। खेल मैदान से लेकर भविष्य के विस्तार तक पर संकट विधायक भाटी ने कहा कि जिस भूमि को आवंटित करने की अनुमति दी गई है, वह वर्तमान में विद्यार्थियों की खेल गतिविधियों, एनसीसी जैसी सह-शैक्षणिक गतिविधियों तथा अन्य अकादमिक उपयोगों के लिए अत्यंत आवश्यक है। भविष्य में कॉलेज के विस्तार, नए संकायों की स्थापना, अत्याधुनिक प्रयोगशालाओं के निर्माण, खेल अधोसंरचना के विकास, एनसीसी इकाई की स्थापना और रोजगारपरक पाठ्यक्रमों के संचालन के लिए यही भूमि आधार बनेगी। यदि इसे अन्य कार्यालय भवनों के निर्माण में उपयोग कर लिया गया, तो महाविद्यालय के दीर्घकालिक विकास की संभावनाएं सीमित हो जाएंगी। बिना परामर्श लिया गया निर्णय, छात्रों में रोष यह भी बताया कि इस भूमि आवंटन के लिए सहमति कॉलेज आयुक्तालय स्तर पर दी गई, जबकि इस प्रक्रिया में कॉलेज प्रशासन, प्राध्यापकों या छात्र प्रतिनिधियों से किसी प्रकार का विचार-विमर्श नहीं किया गया। इस एकतरफा निर्णय के चलते छात्र समुदाय में व्यापक असंतोष है। “सरकारी भवन बनेंगे, लेकिन शिक्षा का भविष्य ढह जाएगा” विधानसभा में भाटी ने कहा कि किसी भी सरकार की प्राथमिकता शिक्षा होनी चाहिए, न कि शैक्षणिक परिसरों की भूमि पर प्रशासनिक भवन खड़े करना। उन्होंने सवाल उठाया कि क्या सरकार के पास अन्य वैकल्पिक स्थल उपलब्ध नहीं हैं, जहां इन कार्यालयों का निर्माण किया जा सके? उन्होंने कहा कि कॉलेज की भूमि का अन्य प्रयोजनों हेतु उपयोग करना विद्यार्थियों के शैक्षणिक हितों और संस्थान के समग्र विकास पर सीधा प्रहार है। यह निर्णय केवल वर्तमान बैच ही नहीं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के अवसरों को भी सीमित कर देगा। एनओसी रद्द करने की मांग शिव विधायक ने उच्च शिक्षा मंत्री से आग्रह किया कि इस विषय को गंभीरता से संज्ञान में लिया जाए और महाविद्यालय की भूमि आवंटन संबंधी अनापत्ति प्रमाण पत्र को तत्काल प्रभाव से रद्द किया जाए। साथ ही, प्रस्तावित राजकीय कार्यालयों के निर्माण के लिए अन्यत्र वैकल्पिक भूमि आवंटित की जाए, ताकि महाविद्यालय में अध्ययनरत हजारों विद्यार्थियों के हित सुरक्षित रह सकें। भाटी ने यह भी कहा कि पश्चिमी राजस्थान जैसे सीमांत क्षेत्र में उच्च शिक्षा संस्थानों की संख्या पहले ही सीमित है। ऐसे में उपलब्ध संसाधनों को और संकुचित करना विकास के दावों के विपरीत है।



Source link

विज्ञापन बॉक्स (विज्ञापन देने के लिए संपर्क करें)

Related Post

आज का मौषम
Live Cricket
आज का राशिफल
लाइव शेयर मार्केट