अपनी नर्सरी में धतूरे का पौधा उगाता था जेफ्री एपस्टीन:  नशे में इस्तेमाल होता है, भगवान शिव से जुड़ा है इसका फूल

अपनी नर्सरी में धतूरे का पौधा उगाता था जेफ्री एपस्टीन: नशे में इस्तेमाल होता है, भगवान शिव से जुड़ा है इसका फूल


वॉशिंगटन डीसी48 मिनट पहले

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हाल ही में जारी हुए एपस्टीन फाइल्स के ईमेल्स में यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन की जहरीले पौधों में दिलचस्पी को लेकर चौंकाने वाली जानकारी सामने आई है। इन ईमेल्स में खास तौर पर ‘ट्रम्पेट प्लांट्स’ (धतुरा का पौधा) का जिक्र है।

ईमेल्स में ऐसे लेख फॉरवर्ड किए गए थे, जिनमें कोलंबिया में इसके इस्तेमाल का जिक्र था। बताया गया कि इसके असर में व्यक्ति को कहीं भी ‘ले जाया’ जा सकता है, क्योंकि वह पूरी तरह आज्ञाकारी और भ्रमित हो जाता है।

हिंदू परंपरा में धतूरा भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। पौराणिक कथाओं के मुताबिक, समुद्र मंथन के दौरान जब विष निकला, तो शिव ने संसार की रक्षा के लिए उसे पी लिया। शिव मंदिरों में धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं।

एपस्टीन फाइल्स में ‘जॉम्बी फ्लावर’ क्या है?

ईमेल के स्क्रीनशॉट से पता चलता है कि उसके फाइनेंसर ने ऐसे पौधों में रुचि दिखाई थी। धतुरा के पौधों से स्कोपोलामीन नाम का एक रसायन निकलता है, जो दिमाग पर गहरा असर डालता है। स्कोपोलामीन याददाश्त कमजोर कर सकता है, व्यक्ति को भ्रम की स्थिति में डाल सकता है। इसी वजह से कुछ विशेषज्ञ इसे ‘जॉम्बी ब्रीथ’ भी कहते हैं।

  • इसमें बताया गया था कि यह दवा लोगों को बहुत ज्यादा असर डालती है और उन्हें आसानी से कंट्रोल किया जा सकता है।
  • ईमेल्स से पता चलता है कि एपस्टीन धतुरा के पौधे के बारे में पूछताछ कर रहा था। हालांकि यह साफ नहीं है कि उसने इनका इस्तेमाल किया या नहीं।
  • वहीं, 2022 के एक अन्य ईमेल में एक पीड़ित के बयान का जिक्र है, जिसमें स्कोपोलामीन के संपर्क में आने की बात कही गई।
  • इन दस्तावेजों से यह साफ होता है कि एपस्टीन ऐसे पौधों से जुड़ा था, जिनमें दिमाग को प्रभावित करने की ताकत होती है।

ईमेल्स में 3 बार इस पौधे का जिक्र

पहला ईमेल (3 मार्च 2014):

यह ईमेल सीधे एपस्टीन ने ‘एन रोड्रिगेज’ नाम के एक व्यक्ति को भेजा था। ईमेल में उन्होंने लिखा था कि नर्सरी में लगे उनके ट्रम्पेट पौधों के बारे में क्रिस से पूछो। इससे साफ संकेत मिलता है कि एपस्टीन की नर्सरी में ट्रम्पेट प्लांट यानी धतूरा के पौधे लगे हुए थे।

दूसरा ईमेल (27 जनवरी 2015):

बताया जाता है कि यह ईमेल फ्रांसीसी फैशन फोटोग्राफर एंटोनी वेरग्लास की ओर से आगे भेजा गया था। ईमेल्स में जिस “जॉम्बी फ्लावर” का जिक्र है, वह दरअसल ट्रम्पेट आकार वाले पौधे हैं। फॉरवर्ड किए गए एक मैसेज का शीर्षक था- “स्कोपोलामीन: कोलंबिया के जंगलों में उगने वाली एक शक्तिशाली दवा, जो इंसान की चेतना को खत्म कर देती है।”

यह मैसेज डेली मेल और वाइस की एक रिपोर्ट से जुड़ा था। रिपोर्ट में स्कोपोलामीन को ऐसा पदार्थ बताया गया था, जिसके असर में व्यक्ति बेहद आज्ञाकारी हो सकता है।

लेख की कुछ पंक्तियों को खास तौर पर चिन्हित किया गया था। उनमें कहा गया था कि इस नशे के प्रभाव में व्यक्ति को कहीं भी ले जाया जा सकता है और वह छोटे बच्चे की तरह व्यवहार करने लगता है।

तीसरा ईमेल (7 फरवरी 2022):

तीसरा दस्तावेज सीधे एपस्टीन के साथ बातचीत नहीं है। यह गिलेरमो फारिनास नाम के व्यक्ति द्वारा जुआन एंटोनियो गोंजालेज को भेजा गया एक ईमेल बताया गया है, जिसकी कॉपी जोसेफ मंजारो को भी भेजी गई थी। फिलहाल यह साफ नहीं है कि ये लोग कौन हैं।

इसमें मंजारो ने दिसंबर 2014 की एक कथित घटना का जिक्र किया है। उनका दावा है कि उन्हें स्कोपोलामीन नाम के नशीले पदार्थ के जरिए बेहोश किया गया। यह पदार्थ कुछ खास पौधों से बनता है, जिनमें ट्रम्पेट प्लांट यानी धतूरा भी शामिल है।

बयान में साफ तौर पर स्कोपोलामीन का नाम लिया गया है। मंजारो का आरोप है कि उन्हें ले जा रहे दो लोगों में से एक ने कहा था, “मैंने उसे काफी मात्रा में स्कोपोलामीन दे दिया है।” इसके बाद उसने याददाश्त खोने और बेहद ज्यादा नींद आने जैसी हालत का दावा किया है।

हिंदू धर्म में पवित्र माना जाता है धतूरे का फूल

हिंदू परंपरा में बिगुल जैसे आकार वाला धतूरा फूल पवित्र माना जाता है। यह भगवान शिव से जुड़ा हुआ है। मान्यता है कि समुद्र मंथन के दौरान निकले विष को भगवान शिव ने पिया था, जिससे सृष्टि की रक्षा हुई। धतूरा उसी विष से जुड़ा प्रतीक माना जाता है।

भारत में कई मंदिरों में, खासकर महाशिवरात्रि के समय, धतूरा के फूल और फल चढ़ाए जाते हैं। हालांकि यह पौधा जहरीला होता है, फिर भी इसे आध्यात्मिक शक्ति और सुरक्षा का प्रतीक माना जाता है। हालांकि इस धार्मिक महत्व का एपस्टीन फाइल्स में बताए गए संदर्भ से कोई सीधा संबंध नहीं है।

भारतीय लड़की भी यौन अपराधी एपस्टीन का शिकार हुई, नई फाइल्स में खुलासा यौन अपराधी जेफ्री एपस्टीन से जुड़ी नई फाइलों में खुलासा हुआ है कि एक भारतीय लड़की भी उसका शिकार हुई थी। दस्तावेजों के मुताबिक अमेरिकी अधिकारियों ने उसे पीड़ित मुआवजा फंड से भुगतान दिलाने के लिए भारत में तलाश शुरू की थी।

13 जनवरी 2020 की एक ईमेल में अमेरिकी अधिकारियों के बीच हुई बातचीत सामने आई है। इसमें भारत में मौजूद पीड़िता का पता और जानकारी जुटाने को कहा गया है, ताकी भारत स्थित अमेरिकी दूतावास के जरिए उससे संपर्क किया जा सके। यह ईमेल एपस्टीन की अगस्त 2019 में जेल में हुई मौत के बाद की है।

रिलीज दस्तावेजों में इस मेल का टाइटल ‘एपस्टीन विक्टिम्स’ है, हालांकि अधिकारियों के नाम और कुछ जानकारियां छुपाई गई हैं।

कौन था जेफ्री एपस्टीन?

जेफ्री एपस्टीन न्यूयॉर्क का करोड़पति फाइनेंसर था। उसकी बड़े नेताओं और सेलिब्रिटीज से दोस्ती थी।

उस पर 2005 में नाबालिग लड़की के साथ यौन उत्पीड़न का आरोप लगा। 2008 में उसे नाबालिग से सेक्स की मांग करने का दोषी ठहराया गया। उसे 13 महीने की जेल हुई। 2019 में जेफ्री को सेक्स ट्रैफिकिंग के आरोपों में गिरफ्तार किया गया। लेकिन मुकदमे से पहले ही उसने जेल में आत्महत्या कर ली।

उसकी पार्टनर घिसलीन मैक्सवेल को 2021 में उसकी मदद करने के आरोपों में दोषी करार दिया गया। वह 20 साल की सजा काट रही है।

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