पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम:  चरित्र अंतिम प्राथमिकता बना इसलिए लोग देह पर टिक गए

पं. विजयशंकर मेहता का कॉलम: चरित्र अंतिम प्राथमिकता बना इसलिए लोग देह पर टिक गए


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  • Vijay Shankar Mehta Column: Character Priority Lost, People Focused On Body

6 घंटे पहले

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पं. विजयशंकर मेहता

दुनिया में तीन ही समस्याएं हैं। पहली, पैसा होना या न होना। दूसरी, पुरुष के जीवन में स्त्री का होना या न होना। और तीसरी, स्त्री के जीवन में पुरुष का होना या न होना। बाकी समस्याएं इन्हीं तीनों का विस्तार हैं।

हमारे यहां जब अष्टलक्ष्मी का पूजन किया जाता है तो उनका एक रूप गजलक्ष्मी भी है। इसमें लक्ष्मी जी सफेद हाथी पर बैठी हैं और यह सफेद हाथी उड़ भी सकता है। इसका मतलब यही है कि पैसा कुछ भी कर सकता है।

इसीलिए वह समस्या और समाधान, दोनों बन जाता है। दूसरी और तीसरी समस्या में सारा खेल स्त्री-पुरुष का है। चूंकि इन दिनों चरित्र और नैतिकता अंतिम प्राथमिकता बनते जा रहे हैं। इसीलिए लोग देह पर टिक गए।

पिछले दिनों सुना कि पांच साल की एक बच्ची से उसी के रिश्ते के भाई, जिसकी उम्र तेरह साल थी- ने दुष्कर्म किया और बच्ची बुरी तरह आहत है। यह घटना अन्य समाचारों की तरह गुजर गई। लेकिन यह चिंता छोड़ गई कि इन तीन समस्याओं में बाकी दो समस्याएं अब और बड़ी होती जाएंगी।

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