गयाजी में ईंट भट्ठे पर काम करने वाले 62 मजदूरों और उनके परिवार को मुक्त कराया गया। इनमें छोटे बच्चे भी हैं। ये लोग करीब 30 साल से बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। जिला प्रशासन को सूचना मिली तो ईंट भट्ठे पर छापेमारी हुई। पीड़ित आशा मांझी ने कहा कि 30 साल से बंधुआ बनाकर काम कराया जा रहा था। ईंट भट्ठा से मुझे बाहर जाने की आजादी नहीं थी। मजदूरी भी पूरी नहीं मिलती थी। प्रशासन ने आज बंधन से मुक्त कराया। मामला फतेहपुर प्रखंड का है। सूचना के बाद डीएम ने टीम बनाई दरअसल, डीएम शशांक शुभंकर को सूचना मिली थी कि फतेहपुर के पूर्वी बाथन गांव स्थित एक ईंट भट्ठे में वर्षों से बंधुआ मजदूरी कराई जा रही है। इसके बाद डीएम ने तुरंत टीम गठित की। सहायक समाहर्ता डॉ. सूरज कुमार की अगुवाई में असिस्टेंट लेबर कमिश्नर, बीडीओ फतेहपुर और पुलिस की संयुक्त टीम ने छापेमारी की। छापेमारी आरवाईसी ईंट भट्ठा रामाशीष यादव की बताई जा रही है। प्रशासन ने सभी पीड़ितों को सुरक्षित उनके घर भेज दिया है। प्रशासन का कहना है कि रेस्क्यू किए गए मजदूरों के पुनर्वास की प्रक्रिया भी शुरू कर दी गई है। ईंट भट्ठा संचालक को गिरफ्तार कर लिया गया है
सहायक समाहर्ता डॉ. सूरज ने कहा कि आरवाईसी ईंट भट्ठे से मुक्त कराए गए मजदूर बंधुआ मजदूरी कर रहे थे। इससे पहले उन्हें बाहर भेजा जाता था। इनसे पीढ़ी दर पीढ़ी बंधुआ मजदूरी कराई जा रही थी। मजदूरों को ऋण चुकता कराने के नाम पर उनके परिवार और बच्चों से काम लिया जा रहा था। मजदूरों से हुई बातचीत में यह जानकारी मिली है कि ऋण का ब्याज बढ़ता जा रहा था और वे बंधुआ मजदूरी को विवश थे। सहायक समाहर्ता डॉ सूरज कुमार ने बताया कि छापेमारी के दौरान ईंट भट्ठा संचालक रामाशीष यादव फरार हो गया। हालांकि मौके से मुंशी देवेंद्र यादव को गिरफ्तार कर लिया गया है। इस मामले में डीएम के निर्देश पर गुरपा थाना में प्राथमिकी दर्ज कर ली गई है। पुलिस अब फरार संचालक की तलाश में जुट गई है।
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